- श्रीमती स्मिती रानी खलखो ने छत्तीसगढ़ शासन से मांग कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं को भी असम की तर्ज पर त्योहारों में बोनस मिले पत्थलगांव में करम पर्व पर सियासत गरमाई! “करम सबका है, रोकने वाले कौन होते हैं?” – स्मिती रानी खलखो का बड़ा बयान
*पत्थलगांव।* जशपुर जिले में आदिवासियों के सबसे बड़े आस्था के पर्व करम को लेकर बवाल मच गया है! एक विशेष समुदाय के द्वारा कहा जा रहा है कि ईसाई आदिवासी करम पर्व नहीं मना सकते, और इसी फरमान के खिलाफ अब आवाज उठी है।आज पत्थलगांव में आदिवासी समाज की अगुवा श्रीमती स्मिती रानी खलखो के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय में जोरदार ज्ञापन सौंपा गया।
खलखो ने दो टूक कहा “जशपुर में बार-बार ईसाई समुदाय पर आरोप लगाया जा रहा है कि वो करम पर्व न मनाएं। अरे भाई, करम पर्व तो हम सभी मूल आदिवासियों का पर्व है, ये कहीं लिखित में नहीं है कि इसे कौन मनाएगा और कौन नहीं। इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।”
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि करम पर्व मनाने पर जो रोक-टोक लगाई जा रही है, उसे तुरंत खत्म किया जाए और शासन-प्रशासन सभी के साथ खड़ा रहे।सिर्फ करम ही नहीं, महतारी वंदन पर भी बड़ी मांग!श्रीमती खलखो ने दूसरी बड़ी मांग उठाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं को भी असम की तर्ज पर त्योहारों में बोनस मिलना चाहिए।”जैसे असम में महिलाओं को त्योहार पर बोनस मिलता है, वैसे ही यहां भी दीपावली और दुर्गा पूजा पर महतारी वंदन का बोनस दिया जाए और हर महीने की राशि 1000 से बढ़ाकर 1500 रुपए की जाए।”
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या फैसला लेता है।










