पिताजी को कांग्रेसी बताया तो भड़क गए उपाध्यक्ष, बोले जूदेव जी 1984 में बसाए थे, प्रमाण लाकर दिखाओ खून में BJP है मेरी… निकाल के दिखाओ!” – निष्कासन की खबर सुनते ही गरजे दुलदुला जनपद उपाध्यक्ष
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
*जशपुर/दुलदुला।* दुलदुला जनपद पंचायत की राजनीति में इन दिनों घमासान मचा है। मंडल ने जनपद उपाध्यक्ष को पार्टी से निष्कासित करने के लिए जिला इकाई को आवेदन दिया है, ऐसी खबर व्हाट्सएप ग्रुपों और मीडिया में आग की तरह फैल गई। लेकिन जिस शख्स को निकाला जा रहा है, उसी को इसकी भनक तक नहीं!
खुद उपाध्यक्ष ने कैमरे पर आकर वो बात कह दी, जिसने मंडल की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
*”बिना नोटिस के कैसे निष्कासन?”*
उपाध्यक्ष ने दो टूक कहा – *”ये खबर मैं आपके समाचार पर और व्हाट्सएप पर देख रहा हूं कि मुझे निष्कासित करने के लिए लेटर लिखा गया है। मुझे पार्टी की ओर से कोई फोन नहीं, कोई नोटिस नहीं, कोई पत्र नहीं। सीधे पत्र बना दिया गया कि इन्हें निकालो। मैं वरिष्ठ नेताओं से जाकर पूछूंगा, मेरा जुर्म क्या है? मैंने कौन सी पार्टी विरोधी गतिविधि की है?”*
*”भाजपा मेरे खून में है”*
अपनी सफाई में उन्होंने भावुक अपील की। कहा, “जिस पार्टी के कारण आज हम हैं, जो पार्टी हमारे रग-रग में, खून में बसी है, हम उसका विरोध सोच भी नहीं सकते। मंडल को बताना पड़ेगा कि मैंने कब, कहां, पार्टी के खिलाफ काम किया।”
*”मेरे पिता को कांग्रेसी साबित करके दिखाओ”*
इस पूरे विवाद में सबसे तीखा मोड़ तब आया जब उनके पिता को कांग्रेसी बताया गया। इस पर उपाध्यक्ष भड़क गए।
बोले – *”कोई एक प्रमाण ला दे कि मेरे पिताजी कांग्रेसी हैं। स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी 1984 में मेरे पिताजी को यहां लाकर बसाए थे। वो जूदेव जी के सबसे कट्टर समर्थकों में से थे। पिताजी ने पूरी जिंदगी भाजपा के लिए दी है। ऐसे ही लिख देने से कोई कांग्रेसी नहीं हो जाता।”*
*अंदरूनी गुटबाजी की बू?*
सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ निष्कासन का नहीं, बल्कि दुलदुला भाजपा में चल रही अंदरूनी खींचतान का नतीजा है। जनपद में उपाध्यक्ष की बढ़ती सक्रियता कुछ लोगों को रास नहीं आ रही थी। अब बिना पक्ष सुने सीधे निष्कासन की सिफारिश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
*अब आगे क्या?*
उपाध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि वे चुप नहीं बैठेंगे। वे सीधे जिला अध्यक्ष, सांसद और संभाग के बड़े नेताओं के पास जाकर अपना पक्ष रखेंगे और न्याय मांगेंगे।फिलहाल दुलदुला की सियासत में एक ही चर्चा है – क्या बिना सुनवाई के ही फैसला लिखा जा रहा है? क्या ये निष्कासन है या किसी को साइडलाइन करने की साजिश?फैसला अब हाईकमान करेगा।










