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सुसडेगा एनिकट छत्तीसगढ़ के अधूरे प्रोजेक्ट्स की लिस्ट में एक और बड़ा नाम 32 करोड़ का सुसडेगा एनिकट – 5 साल की मेहनत, 75% काम और फिर 1 साल से ‘फुल स्टॉप’

सुसडेगा एनिकट छत्तीसगढ़ के अधूरे प्रोजेक्ट्स की लिस्ट में एक और बड़ा नाम

32 करोड़ का सुसडेगा एनिकट – 5 साल की मेहनत, 75% काम और फिर 1 साल से ‘फुल स्टॉप’

सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता

*पत्थलगांव (जशपुर)।* जशपुर जिले में सरकारी योजनाओं की हकीकत देखनी हो तो एक बार सुसडेगा एनिकट की ओर रुख कर लीजिए। 32 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। 5 साल की कवायद के बाद 75% काम पूरा हो गया, और फिर पिछले एक साल से सब कुछ ठप। साइट पर सन्नाटा है, मजदूर गायब हैं, और बताया जा रहा है कि ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर जा चुका है।

*किसानों के सपनों पर पानी नहीं, धूल जम रही है*
इस एनिकट से पत्थलगांव ब्लॉक के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों को सिंचाई की उम्मीद थी। रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए पानी मिलने का सपना दिखाया गया था। किसान बताते हैं, “शुरू में जब काम तेजी से चल रहा था तो लगा था कि अब खेत सूखे नहीं रहेंगे, लेकिन एक साल से एक ईंट भी नहीं लगी। जो बना है, वो भी अब टूटने लगा है।”

*तकनीकी नजर से भी खतरा*
विशेषज्ञों का कहना है कि एनिकट जैसे स्ट्रक्चर को अधूरा छोड़ना सबसे खतरनाक है। 75% बना हुआ ढांचा अगर लंबे समय तक पानी और धूप में ऐसे ही पड़ा रहा, तो उसकी मजबूती खत्म हो जाएगी। फिर उसे तोड़कर दोबारा बनाना पड़ेगा, यानी 32 करोड़ पर फिर से करोड़ों का खर्च।

*विभाग की चुप्पी पर सवाल*
सबसे बड़ा सवाल जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर है:
1. जब ठेकेदार ने काम रोका तो उसे नोटिस क्यों नहीं दिया गया?
2. एक साल से साइट बंद है तो विभाग के अफसरों ने निरीक्षण क्यों नहीं किया?
3. 32 करोड़ में से कितना भुगतान हो चुका है और कितना बाकी है?
4. क्या ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हुई?

ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अफसर सिर्फ कागजों में प्रगति दिखा रहे हैं, जमीन पर कोई हलचल नहीं है।

*क्या कहते हैं किसान?*यह
“हम शासन-प्रशासन से मांग करते हैं कि कलेक्टर खुद इस पूरे मामले की जांच कराएं। जिम्मेदारी तय हो, ठेकेदार पर कार्रवाई हो और बचा हुआ 25% काम युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए। नहीं तो ये एनिकट किसानों के लिए नहीं, भ्रष्टाचार की मिसाल बन जाएगा।” – एक स्थानीय किसान

*आगे क्या?*
ये सिर्फ एक एनिकट का मामला नहीं है। ये 32 करोड़ रुपये के सरकारी खजाने, किसानों के भविष्य और सिस्टम की जवाबदेही का मामला है। अगर समय रहते निर्माण दोबारा शुरू नहीं हुआ तो सुसडेगा एनिकट छत्तीसगढ़ के अधूरे प्रोजेक्ट्स की लिस्ट में एक और बड़ा नाम बनकर रह जाएगा।

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