पत्थलगांव हॉस्टल कांड – चोरी बच्चों ने की, चुप्पी सिस्टम ने साध ली! आखिर किसके दबाव में है कार्रवाई? पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह ने कहा, “यह आदिवासी बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर 7 दिन के भीतर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो हम आदिवासी समाज के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे”
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
*जशपुर।* शा. प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास, पत्थलगांव से 11 बच्चों का आधी रात निकलकर चोरी करना जितना सनसनीखेज था, उससे भी ज्यादा सनसनीखेज है उसके बाद विभाग और जिला प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी।
समाचार पत्रो में खबर छपने, आयुक्त संजय सिंह का निरीक्षण करने और पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह के आंदोलन की चेतावनी के बाद भी फाइल जस की तस पड़ी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतने संवेदनशील मामले में भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में है?
आयुक्त का निरीक्षण – खानापूर्ति या जांच?*
सूत्र बताते हैं कि आयुक्त ने हॉस्टल का जायजा तो लिया, लेकिन ठोस कार्रवाई को लेकर कोई लिखित आदेश, निलंबन या कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया। पत्रकारों के सवाल पर गोल-मोल जवाब देना इस बात का संकेत है कि विभाग मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। क्या सिर्फ दौरा करके रस्म अदायगी कर दी गई?
अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी और मंडल संयोजक मनीष पैकरा पर मेहरबानी क्यों
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है – हॉस्टल में न पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, न रात में बच्चों की देखरेख के लिए स्टाफ। मंडल स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी मंडल संयोजक की है, लेकिन पहले भी ऐसी लापरवाही की शिकायतें आईं तो भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सवाल उठ रहा है – क्या इन दोनों अधिकारियों पर किसी का वरदहस्त है, जिसके चलते जांच का नाम आते ही फाइल धीमी हो जाती है?
जिला प्रशासन मौन क्यों?*
यह मामला सिर्फ विभाग का नहीं, कानून-व्यवस्था से भी जुड़ा है। 11 नाबालिग बच्चे रात को हॉस्टल से निकल जाते हैं, चोरी की घटना को अंजाम देते हैं – ये बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल है। फिर भी जिला प्रशासन की ओर से न तो हॉस्टल प्रबंधन पर कोई FIR, न ही सुरक्षा ऑडिट के आदेश।
*अभिभावकों में आक्रोश*
अभिभावकों ने कहा – “हमने बच्चों को पढ़ने भेजा था, अपराध की दुनिया में धकेलने नहीं। अगर हमारे बच्चों के साथ कुछ अनहोनी हो जाती तो जिम्मेदार कौन होता? विभाग की लापरवाही ने हमारे बच्चों का भविष्य खतरे में डाल दिया है।”
*पूर्व मंत्री ने फिर दोहराया – आंदोलन होगा*
पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह ने कहा, “यह आदिवासी बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर 7 दिन के भीतर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो हम आदिवासी समाज के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।”
*अब जनता पूछ रही है -*
– क्या रिपोर्ट बनाकर दबा दी गई है?
– क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर टालकर बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है?
– क्या इस हॉस्टल में पहले से ही ऐसी गतिविधियां चल रही थीं, जिस पर पर्दा डाला जा रहा है?
पत्थलगांव हॉस्टल अब चोरी का मामला नहीं रहा, यह सिस्टम की जवाबदेही का मामला बन गया है। देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है, या फिर इस मामले को भी अन्य मामलों की तरह खानापूर्ति में निपटा दिया जाएगा।










