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पत्थलगांव: जहाँ ब्लैकबोर्ड तो है, पर छत नहीं! परछी के नीचे भविष्य गढ़ रहे कटंगजोर के नौनिहाल

  • पत्थलगांव: जहाँ ब्लैकबोर्ड तो है, पर छत नहीं! परछी के नीचे भविष्य गढ़ रहे कटंगजोर के नौनिहाल

सोचिए, आपका बच्चा स्कूल जाता है… बस्ता टांगे, टिफिन लिए… लेकिन स्कूल में क्लासरूम नहीं, परछी है! छत नहीं, आसमान है!

*पत्थलगांव से इस मासूम पुकार को… क्या रायपुर तक सुनेगा कोई?*

 

सम्पादक श्याम नारायण 

पत्थलगांव/ सोचिए, आपका बच्चा स्कूल जाता है… बस्ता टांगे, टिफिन लिए… लेकिन स्कूल में क्लासरूम नहीं, परछी है! छत नहीं, आसमान है!

जी हां, ये कहानी किसी फिल्म की नहीं, *जशपुर जिले के पत्थलगांव ब्लॉक के ग्राम कटंगजोर* की है। यहाँ सरकारी कागजों में *शासकीय प्राथमिक शाला कटंगजोर* है, लेकिन हकीकत में ये भवन अब खंडहर बन चुका है।

भवन इतना जर्जर कि उस पर *”खतरनाक भवन, शिफ्ट किया जाता है”* का नोटिस चस्पा है। अब क्या? तो गुरुजी ने जुगाड़ लगाया – पास के पंचायत भवन की परछी के नीचे ही स्कूल लगा दिया।

*कभी धूप, कभी बारिश, पढ़ाई जारी है!*

ना पंखा, ना दीवार, ना ब्लैकबोर्ड की सुरक्षा… उसी परछी के नीचे  बच्चे जमीन पर बैठकर ABCD पढ़ रहे हैं। हवा चली तो कॉपी उड़ी, बारिश हुई तो छुट्टी!

*सरकार करोड़ों खर्च कर रही, यहाँ परछी ही स्कूल है*

ग्रामीण बताते हैं – “हमने BEO को बोला, कलेक्टर को बोला, विधायक गोमती साय को भी लिखकर दिया। सबने कहा – प्रस्ताव भेज दिया है।”

प्रस्ताव तो फाइलों में दौड़ रहा है सर, पर यहाँ बच्चों का बचपन परछी के नीचे अटका है।

थक-हारकर अब इन  बच्चों ने खुद मोर्चा संभाला है। हाथ जोड़कर कैमरे पर बोल रहे हैं – *”विष्णुदेव काका, हमर स्कूल बनवा दो…”*

BEO कमलेश यादव खुद मान रहे हैं – “भवन जर्जर है, इसलिए बच्चों को पंचायत में बैठा रहे हैं।”

सवाल सीधा है – जब भवन जर्जर था तो नया क्यों नहीं बना? और जब बच्चे परछी में हैं तो अधिकारियों का दिल क्यों नहीं पसीज रहा?

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