_हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी की लापरवाही और मंडल संयोजक मनीष पैकरा की नाकाम मॉनिटरिंग: आधी रात को 11 नाबालिगों ने लूटी लक्ष्मी मोबाइल दुकान — पत्थलगांव हॉस्टल कांड में दोनों जिम्मेदारों पर निलंबन और एफआईआर की मांग!_
_बच्चों के भविष्य की रखवाली कौन कर रहा था? जिम्मेदारों पर उठे बड़े सवाल_
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
जशपुर/ पत्थलगांव रात के 12 बजे होंगे। छात्रावास के कमरों में सन्नाटा होना चाहिए था, लेकिन अंदर कुछ और ही खेल चल रहा था। 11 नाबालिग बच्चों ने मिलकर मोबाइल मिशन’ को अंजाम दिया — निशाने पर थी लक्ष्मी मोबाइल दुकान! लाखों रुपये के मोबाइल पार। सुबह जब दुकानदार ने शटर उठाया, तो होश उड़ गए। और छात्रावास के अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी ? वो तो हास्टल से ही गायब मिले!
कैसे हुआ ‘मिशन’? चौंकाने वाली सच्चाई
सूत्रों के मुताबिक, आधी रात को हॉस्टल के बच्चे एक-एक कर बाहर निकले। न कोई चौकीदार रोका, न कोई अधीक्षक टोका। लक्ष्मी मोबाइल दुकान का ताला तोड़ा गया और अंदर से कीमती मोबाइल फोन समेट लिए गए। बच्चों की उम्र सुनकर पुलिस भी हैरान — सब के सब नाबालिग! सवाल यह है कि इतनी छोटी उम्र में बच्चों को चोरी का रास्ता किसने दिखाया?
_अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी गायब, व्यवस्था ध्वस्त_
सबसे बड़ा सवाल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी पर उठ रहा है। छात्रावास में रहने वाले बच्चों की देखरेख, अनुशासन और सुरक्षा — यह सब अधीक्षक की जिम्मेदारी है। लेकिन घटना की रात अधीक्षक निकेतकारी छात्रावास में मौजूद ही नहीं थे। अभिभावकों का आरोप है कि सूर्यकांत निकेतकारी की लापरवाही कोई नई बात नहीं — पहले भी कई बार शिकायतें हुईं, पर कार्रवाई शून्य।
_क्या पत्थलगांव पुलिस हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी पर दर्ज करेगी एफआईआर?_
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पत्थलगांव पुलिस हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी पर एफआईआर दर्ज करेगी? जानकारों का कहना है कि घटना की रात अधीक्षक का हॉस्टल से गायब रहना, बच्चों का आधी रात को बाहर निकलना और किसी रोक-टोक का न होना — यह सब घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है। नाबालिग बच्चों की सुरक्षा में चूक के लिए अधीक्षक की आपराधिक जवाबदेही भी बनती है।
अभिभावकों और स्थानीय लोगों की मांग है कि अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी के खिलाफ लापरवाही बरतने और कर्तव्य में चूक के लिए एफआईआर दर्ज हो, ताकि भविष्य में कोई अधीक्षक बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ न कर सके। अब गेंद पत्थलगांव पुलिस के पाले में है — क्या पुलिस इस दिशा में कदम उठाएगी या मामला सिर्फ नाबालिगों तक सीमित रह जाएगा?
_मंडल संयोजक मनीष पैकरा पर भी उठ रहे सवाल — मॉनिटरिंग सिर्फ कागजों में?_
इस पूरे कांड में सिर्फ हॉस्टल अधीक्षक ही नहीं, _मंडल संयोजक मनीष पैकरा_ पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छात्रावासों की निगरानी, निरीक्षण और जांच की जिम्मेदारी मंडल संयोजक की होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मनीष पैकरा कभी हॉस्टल की मॉनिटरिंग या जांच करते ही नहीं — अगर कभी होती भी है, तो वह सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है।
सवाल साफ है — अगर हॉस्टल की नियमित जांच और मॉनिटरिंग होती, तो अधीक्षक की गैरहाजिरी, बच्चों का आधी रात को बाहर निकलना और व्यवस्था की यह ढिलाई कब की पकड़ में आ जाती। इतनी बड़ी घटना तभी होती है जब निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो। जानकारों का कहना है कि इस कांड में _हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी जितना दोषी है, उतना ही मंडल संयोजक मनीष पैकरा भी_ — क्योंकि रोकथाम की पहली जिम्मेदारी उन्हीं की थी।
_गुस्से में अभिभावक, निलंबन की मांग तेज_
घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। सबकी एक ही मांग — लापरवाह अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी को तुरंत निलंबित किया जाए, साथ ही मंडल संयोजक मनीष पैकरा की भूमिका की भी जांच हो और उन्हें भी निलंबित किया जाए। लोगों का कहना है कि जिन बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के लिए हॉस्टल भेजा गया था, वे चोरी जैसे अपराध में फंस गए। इसका जिम्मेदार सिर्फ बच्चे नहीं, वह ढीली व्यवस्था भी है जिसने उन्हें रोकने की कोशिश तक नहीं की।
_पुलिस जांच में जुटी, बच्चों का भविष्य दांव पर_
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चोरी गए मोबाइलों की बरामदगी भी की गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इन 11 नाबालिगों का भविष्य अब क्या होगा? एक गलती ने उनके करियर पर काला धब्बा लगा दिया है। किशोर न्याय व्यवस्था के तहत कार्रवाई होगी, पर इन बच्चों को सही राह पर लाने की जिम्मेदारी किसकी?
_प्रशासन की चुप्पी, कब टूटेगी?_
अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या लापरवाह अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी पर निलंबन की गाज गिरेगी और एफआईआर दर्ज होगी? क्या मंडल संयोजक मनीष पैकरा से जवाबदेही मांगी जाएगी एवं उनकी भी निलंबन की मांग? क्या छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार होगा? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? बच्चों के भविष्य का सवाल बड़ा है जवाब आना बाकी है।










