*पत्थलगांव नगरपालिका “दिवालिया” के कगार पर : काम फुल, पैसा निल! जनप्रतिनिधि बेहाल, कर्मचारी परेशान* 💸
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
*पत्थलगांव (जशपुर)।* वाह रे नगरपालिका पत्थलगांव! टैक्स वसूलने में नंबर वन, पैसा देने में सबसे फिसड्डी। पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष श्याम नारायण गुप्ता ने ऐसा बम फोड़ा है कि पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। सुनने वालों के होश उड़ गए जब पता चला कि नगरपालिका अब दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई है।
*वर्षों से नहीं मिली सैलरी, फिर भी चल रही “समाजसेवा”*
गुप्ता जी ने खुलासा किया कि नगरपालिका के जनप्रतिनिधियों को वर्षों बीत जाने के बाद भी आज तक उनके मानदेय का एक रुपया नहीं मिला है। बेचारे पार्षद और जनप्रतिनिधि मुफ्त में समाजसेवा करने को मजबूर हैं। चुनाव में बड़े-बड़े वादे करने वाले अब खुद अपने हक के पैसे के लिए तरस रहे हैं।
*कर्मचारियों का दर्द: वेतन के लिए महीनों का इंतजार*
सिर्फ नेता ही नहीं, नगरपालिका के कर्मचारियों की हालत तो और भी दयनीय है। सफाईकर्मी से लेकर दफ्तर के बाबू तक, सबको वेतन के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। घर का राशन, बच्चों की फीस, दवाई का खर्चा, सब भगवान भरोसे। कर्मचारी पूछ रहे हैं, आखिर हमारा कसूर क्या है?
*टैक्स पूरा, सुविधा शून्य*
मजेदार बात यह है कि जनता से टैक्स वसूलने में कोई कमी नहीं होती। हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, दुकान टैक्स, सब समय पर वसूला जाता है। लेकिन जब सुविधा देने की बारी आती है तो खजाना खाली! सड़कें टूटी हैं, नालियां जाम हैं, स्ट्रीट लाइटें बंद हैं और सफाई व्यवस्था राम भरोसे।
*गुप्ता जी का तीखा हमला*
श्याम नारायण गुप्ता ने कहा, “यह प्रशासनिक लापरवाही और आर्थिक कुप्रबंधन का जीता-जागता उदाहरण है। नगरपालिका के पास न पर्याप्त राजस्व आ रहा है, न शासन से मिलने वाली राशि का सही इस्तेमाल हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो एक दिन नगरपालिका का ताला लग जाएगा।”
*ज़रा हटके सवाल:*
– टैक्स का पैसा जाता कहां है? कहीं बड़े साहबों की गाड़ियों के डीजल में तो नहीं? 😉
– जब खजाने में पैसा नहीं, तो चुनाव में इतने बड़े वादे क्यों किए गए?
– क्या पत्थलगांव की जनता अंधेरे में रहने और गंदगी में जीने को मजबूर रहेगी?
– शासन कब जागेगा? क्या दिवालिया होने के बाद?
*पानी सप्लाई भी बीमार*
*जनता में उबाल*
नगर पालिका क्षेत्र में इनदिनों पीने के पानी। के लिय। मारा मारी चल रहा है कही नल टूटा मिलेगा तो कही हजारों।लीटर पानी बहते रहता अधिकारी अपने आप में मस्त रहते है ।जल विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि नगरंपचयत में एक भी सामान नहीं है।जिसके कारण पूरा शहर गंदे पानी पीने को मजबूर है।
नगरवासियों में इस खुलासे के बाद भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है, “टैक्स हमसे पूरा लेते हो, सुविधा के नाम पर ठेंगा दिखाते हो। पैसा दो या गद्दी छोड़ो!” कई नागरिकों ने शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
*मानदेय का खेला*
जब से सीएमओ जावेद नगर पंचायत फिर नगर पालिका होने के बाबजूद पार्षदों का मानदेय में घोटाला
*आगे क्या?*
अब सबकी निगाहें शासन पर टिकी हैं। क्या सरकार इस कंगाल नगरपालिका की झोली भरेगी? क्या जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा? या फिर पत्थलगांव नगरपालिका इतिहास की किताबों में “दिवालिया” के नाम से दर्ज हो जाएगी?










