_सुखरापारा एकलव्य विद्यालय पर सवाल: शेखर स्कूल के व्याख्याता एलबी चंद्रमणि यादव प्रभारी प्राचार्य, इतने बड़े पद की जिम्मेदारी क्यों?
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
*जशपुर/उदयपुर एक्सप्रेस।* सुखरापारा एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो प्रभारी प्राचार्य चंद्रमणि यादव राजनीतिक पकड़ वाले माने जाते हैं और अपने प्रभाव के दम पर इस जिम्मेदार पद पर जमे हुए हैं।
ुर त्थलगांव के सुखरापारा में आदिवासी बच्चों के भविष्य से जुड़े सुखरापारा एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। यहां प्रभारी प्राचार्य के रूप में पदस्थ चंद्रमणि यादव की मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शेखरपुर में व्याख्याता (एलबी) के पद पर है। सवाल यह उठ रहा है कि एक नियमित व्याख्याता को एकलव्य जैसे लगभग 400 से अधिक आवासीय बच्चों वाले प्रतिष्ठित विद्यालय के प्राचार्य जैसे इतने जिम्मेदार पद की जिम्मेदारी कैसे दे दी गई?
नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति?
शिक्षा विभाग के जानकारों की मानें तो एकलव्य विद्यालय के प्राचार्य का पद अत्यंत संवेदनशील और पूर्णकालिक है। इसमें शैक्षणिक नेतृत्व, हॉस्टल प्रबंधन, वित्तीय अधिकार और अनुशासन तीनों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में एक अन्य स्कूल में पदस्थ व्याख्याता को प्रभारी बनाकर दोहरा प्रभार देना व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगा रहा है।
क्या कहती है जमीनी हकीकत
चंद्रमणि यादव की मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शेखरपुर स्कूल है,एकलव्य विद्यालय प्रभारी व्यवस्था के चलते महत्वपूर्ण निर्णय, वित्तीय स्वीकृति और मॉनिटरिंग सब ठप पड़े हैं।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं
कुछ दिन पूर्व अतिथि शिक्षकों ने वेतन रोकने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई थी। लेकिन उसके बाद भी जिला प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई नजर नहीं आ रही है, जो स्वयं में एक बड़ा सवाल है। शासन के आदेश के बावजूद प्रशासनिक निष्क्रियता से शिक्षकों में गहरा आक्रोश है। क्या शिकायतें केवल फाइलों में दबकर रह जाएंगी?
विभाग की चुप्पी पर सवाल
इतने महत्वपूर्ण विद्यालय में स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति न करना और एक व्याख्याता एलबी को प्रभार देकर काम चलाना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। क्या विभाग के पास योग्य अधिकारी नहीं हैं? या फिर जानबूझकर इस पद को प्रभारी के भरोसे रखा गया है? पालकों ने जिला जशपुर कलेक्टर और ट्राइबल विभाग से मांग की है कि इस व्यवस्था की जांच हो और जल्द से जल्द पूर्णकालिक योग्य प्राचार्य की पदस्थापना की जाए।










