*अंधेर नगरी चौपट राजा! पत्थलगांव हॉस्टल कांड में सिर्फ ‘हटाने’ की कार्रवाई, सहायक आयुक्त संजय सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल*
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
पत्थलगांव/ मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा पत्थलगांव में आदिवासी छात्रावास का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शासकीय प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास के दोषी हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी को सिर्फ हटाया गया है, सूत्रों से मिली जानकारी के बाद पूरे मामले में हड़कंप मच गया है।
*पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह ने भी उठाए थे सवाल*
बता दें कि इस पूरे मामले में पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह ने भी पहले ही कहा था कि आदिवासी बच्चों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, सिर्फ हटाना समाधान नहीं है।उनके द्वारा उठाए गए सवाल आज सच साबित होते दिख रहे हैं। जब एक पूर्व मंत्री भी इस तरह की लीपापोती पर सवाल उठा चुके हैं, तो सहायक आयुक्त की कार्रवाई और भी संदेह के घेरे में आ जाती है।
*मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में ही अंधेर नगरी!*
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विधानसभा क्षेत्र में ही अगर दोषी अधिकारियों को गोद में बैठाया जाएगा, तो प्रदेश के बाकी हॉस्टलों का क्या हाल होगा? जनता पूछ रही है – *क्या सहायक आयुक्त संजय सिंह “अंधेर नगरी चौपट राजा” की तर्ज पर काम कर रहे हैं?*
*सहायक आयुक्त संजय सिंह की कार्यशैली पर सवाल*
इतने संवेदनशील मामले में सिर्फ हटाने जैसी हल्की कार्रवाई कर सहायक आयुक्त संजय सिंह ने खुद को सवालों के घेरे में ला दिया है। लोगों का कहना है कि ये “अंधेर नगरी चौपट राजा” वाली कहावत को चरितार्थ करता है।चर्चा है कि हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी और मंडल संयोजक मनीष पैकरा को बचाने का खेल चल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विधानसभा में ही अगर आदिवासी हॉस्टल के दोषियों को गोद में बैठाया जाएगा, तो न्याय की उम्मीद कहां से होगी?जनता पूछ रही है –
जब पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह भी सख्त कार्रवाई की मांग कर चुके हैं, तो प्रशासन क्यों नरम है?- FIR और निलंबन की जगह सिर्फ हटाना क्यों?
मंडल संयोजक मनीष पैकरा पर कब गिरेगी गाज?सहायक आयुक्त संजय सिंह आखिर किसे बचाना चाह रहे हैं?
पत्थलगांव की जनता अब इस मामले में कलेक्टर जशपुर और मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग कर रही है।










