“धोखे की बोतल, लूट का खेल: पत्थलगांव में नकली कीटनाशक से किसान कंगाल, दुकानदार मालामाल!”
हमेशा से सुर्खियों में रहने वाला पत्थलगांव एक बार फिर चर्चा में — इस बार नकली कीटनाशक के काले खेल को लेकर!
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
जशपुर।पत्थलगांव ।हमेशा से सुर्खियों में रहने वाले पत्थलगांव का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है — और इस बार वजह है किसानों के साथ हो रहा खुला धोखा। धान के खेत में कीट बढ़े, तो बाजार में लुटेरों की बाढ़ आ गई। कीटनाशक के नाम पर जो बिक रहा है, वह दवा नहीं — धोखे की बोतल है। किसान हजारों रुपये खर्च करता है, दो बार छिड़काव करता है, और खेत में कीट पहले से ज्यादा मुस्कुराते हैं। फसल चौपट, जेब खाली — हिसाब कौन देगा?
*सस्ती दवा का जाल: MRP से कम, असर से भी कम*
दुकानदार का फॉर्मूला तय है — _”नया फार्मूला, ज्यादा रिजल्ट”_ बोलो, MRP से सस्ती दवा दो, और पक्का बिल मांगने पर मुंह फेर लो। न बैच नंबर साफ, न होलोग्राम — यानी दवा असली है या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं। किसान पूछता है तो जवाब मिलता है — _”पानी कम-ज्यादा हुआ होगा।”_ मतलब गलती हमेशा किसान की, दुकानदार की कभी नहीं!
*छिड़काव के बाद कीट नहीं मरे — पत्तियां पीली पड़ गईं*
सबसे खतरनाक बात यह है कि कई जगहों पर दवा छिड़कने के बाद कीट तो जस के तैसे रहे, उल्टे फसल की पत्तियां पीली पड़ने लगीं। यानी यह दवा कीट मारने के बजाय फसल को ही बीमार कर रही है। जो दवा बचाने आई थी, वही तबाही का कारण बन रही है।
*कृषि विभाग: शिकायतें दराज में, नकली दवा बाजार में*
किसानों का सीधा आरोप — बार-बार शिकायत के बावजूद कृषि विभाग ने न सैंपलिंग की, न किसी दुकान पर छापा मारा। त्योहारी सीजन में मांग चरम पर है और नकली कारोबारियों के हौसले बुलंद। विभाग की यह चुप्पी लापरवाही है या मिलीभगत — यह सवाल अब हर खेत-खलिहान में गूंज रहा है।
किसानों की आखिरी चेतावनी
जिला कलेक्टर और जिला कृषि अधिकारी जशपुर से मांग साफ है — पत्थलगांव की हर दुकान की जांच हो, सैंपल लैब जाएं, और बिना लाइसेंस-बिना बिल बेचने वालों पर ऐसी कार्रवाई हो जो पूरे जिले के लिए नजीर बने। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो सैकड़ों किसानों की खरीफ फसल मिट्टी में मिल जाएगी।










