*महिला प्राचार्य ब्लैकमेलिंग कांड: एक वर्ष होने को आया, फिर भी गिरफ्तारी नहीं — यह अपने आप में बड़ा सवाल*
_एसटी-एससी एक्ट में अपराध दर्ज, सायबर सेल के अधिकारी अजाक एसडीओपी भावेश सामर्थ की कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल_
, सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
*जशपुर/पत्थलगांव।* महिला प्राचार्य को ब्लैकमेल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का मामला दर्ज हुए लगभग *एक वर्ष* होने को आ गया है, लेकिन आरोपी अजित गुप्ता और अमन गुप्ता आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। एसटी-एससी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध होने के बावजूद एक साल तक गिरफ्तारी न होना अपने आप में पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
*एक साल, शून्य गिरफ्तारी*
पीड़िता की शिकायत पर पत्थलगांव पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन इसके बाद जांच मानो ठंडे बस्ते में डाल दी गई। बारह महीने बीत गए — न आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, न ही जांच में कोई ठोस प्रगति दिखी। पीड़िता का कहना है कि वह थाने के चक्कर काट-काटकर थक चुकी है, हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, कार्रवाई नहीं।
*सायबर सेल के अधिकारी, फिर भी नाकामी?*
इस मामले में सबसे चुभने वाला सवाल अजाक एसडीओपी भावेश सामर्थ की भूमिका पर है। वे सायबर सेल के अधिकारी हैं, और यह मामला सीधे ब्लैकमेलिंग व कथित वीडियो से जुड़ा सायबर अपराध है — बावजूद इसके एक वर्ष में न तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी हुई, न ही आरोपियों पर कोई शिकंजा कसा गया। आखिर एक साल में क्या कार्रवाई हुई, इसका जवाब पुलिस के पास नहीं है।
*क्या किसी का संरक्षण?*
स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या दोनों आरोपियों को किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है? वरना एसटी-एससी एक्ट जैसे गैर-जमानती अपराध में एक साल तक आरोपी कैसे खुलेआम घूम सकते हैं? पुलिस की यह निष्क्रियता संदेह के घेरे में है।
*पीड़िता की जिंदगी दूभर*
पीड़िता के अनुसार ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना ने उनकी जिंदगी दूभर कर दी है। नौकरी, सम्मान और मानसिक शांति — सब कुछ दांव पर लग गया है। एक वर्ष से न्याय की आस में बैठी पीड़िता ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।










