पाकरगांव का काला दिन: खंभे में दौड़ा करंट, दो घरों के चिराग बुझे
सम्पादक श्याम नारायण गुप्ता
_कागजों में काम एक जगह, जमीन पर दूसरी — परमिट के नाम पर हुआ खेल, मजदूरों की जान की कीमत कौन चुकाएगा?_
*पत्थलगांव।* मंगलवार को पाकरगांव में जो हुआ, उसने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोहे के खंभे की शिफ्टिंग में लगे 10-12 मजदूरों को क्या पता था कि खंभा नहीं, मौत का तार पकड़ रहे हैं। अचानक दौड़े करंट ने *ठामन ध्रुव* और *अलेक भगत* की जान ले ली। दो मजदूर सिविल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
*कागज कहीं का, काम कहीं का*
हादसे के बाद जो पर्दा उठा, वह चौंकाने वाला है। परमिट किसी और जगह के नाम पर था, लेकिन काम पाकरगांव में चल रहा था। यानी फाइलों में एक पता, जमीन पर दूसरा। यह लापरवाही नहीं, सीधा खेल है। अब सवाल यह है कि यह खेल किसके इशारे पर चल रहा था और किसकी नजर में यह सब हो रहा था?
*पुलिस बोली — जांच जारी*
एसडीओपी डॉ. धुर्वेश जायसवाल ने बताया कि, दोनों मृतकों की पहचान हो चुकी है। पत्थलगांव थाने में मर्ग कायम कर विवेचना चल रही है। घायलों का इलाज सिविल अस्पताल में जारी है।
*विभाग कटघरे में*
विभाग के अपने अधिकारी इस हादसे को कैसे जायज ठहराएंगे? बिना सही परमिट के इतना बड़ा काम चल रहा था और किसी को खबर नहीं? जानकार कहते हैं, यह मिलीभगत के बिना मुमकिन नहीं। ठेकेदार ने नियम तोड़े या विभाग ने आंखें मूंद रखी थीं, सच सामने आना चाहिए।
*ग्रामीण बोले — पहले भी हुआ था*
पाकरगांव के लोगों का गुस्सा जायज है। उनका कहना है कि परमिट के नाम पर फर्जीवाड़ा कोई नई बात नहीं। पहले भी शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई शून्य। आज दो परिवार उजड़ गए। कल कौन?
मांग साफ है
– दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज हो, सिर्फ खानापूर्ति नहीं
– मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी
– घायलों के इलाज का
पूरा खर्च जिम्मेदार उठाएं
– विभाग के उन अधिकारियों पर भी गाज गिरे, जिनकी छत्रछाया में यह काम हुआ










